Saturday, April 25, 2020

एक संस्मरण ।।

एक संस्मरण 
बात पांचवी दर्जे की है, अंग्रेजी के अनुवाद बनाने के नियम पढ़ाते हुए मुन्ना मास्टर साहब ने कहा कि , वाक्य के अंत मे ता है , ती है आदि आये तो समझो बात वर्तमान काल मे हो रही है। उधर हमारा ध्यान क्लास के बाहर  था, मुन्ना मास्टर साहब ने कहा की , पाठक भूतकाल में सोचोगे तो टेंस नही आएगा समझ मे और गाल पे अपने बाये हाथ से प्रसाद जड़ दिया। 
मुन्ना मास्टर साहब चेहरे का भूगोल पढ़ने में माहिर थे और  भावों को पहचान कर छात्रों को सही समय बाये हाथ से प्रसाद जड़ दिया करते थे। उनके पास बेंत का एक अद्भुत  दिव्यास्त्र था जिसे तेल आदि लगा कि वज्र सा कठोर बना दिया गया था। जैसे  नारायण की मूर्ती बिना सुदर्शन और गदा के अधुरी लगती थी , वैसे ही बिना बेंत के मुन्ना मास्टर साहब तेजहीन लगते थे। 
एक बार वाद विवाद प्रतियोगिता की तैयारी कराते हुए उन्होंने मुझसे कहा कि देखो पाठक बोलते समय आत्मविश्वास चरम पर होना चाहिए, पैरों को मजबूती  से जमा के रखना है और शब्द शब्द मुखर होने चाहिए तब जा के एक अच्छे वक्ता बनोगे। ऐसा कहते हुए वो खुद वृहद आत्मविश्वास की मूर्ति लगते थे और उनकी भौहे तन जाती थी, मानो हर दिन ही एक प्रतियोगिता हो। वो समय भी आया , शहर के जाने माने शिशु मंदिर के तेजस्वी छात्र प्रवीन त्रिपाठी भैया सामने थे और एक एक करके और प्रतिभागियों के तर्कों को काट रहे थे। सबने मान लिया था कि प्रथम स्थान आरक्षित हो चुका है। जब हमारी बारी आई तो कांपते हुए कदमो से स्टेज पर जाते हुए मुन्ना मास्टर साहब को देखते ही सांस तेज हो गयी, लगा कि यदि गड़बड़ हुआ था आज वज्र का प्रहार निश्चित है, पर ये क्या मुन्ना सर ने एक मुस्कुराहट के साथ मौन संकेत दिया कि आराम से जैसे थ्री इडियट में रेंचो ने आल इज़्ज़ वेल कहा था। 
पैरो को मजबूती से जमाया गया , आत्मविश्वास भरा गया और शव्दों को मुखर करते हुए कहा कि "परम् आदरणीय सभाध्यक्ष महोदय, माननीय गुरुजन वृन्द, यहां पर उपस्थित छात्रों और मित्रो आप सबकी उपस्थिति को नमन करते हूँ" ऐसा कहते हुए बहते पानी की तरह से वक्तव्य रख दिया गया निर्धारित समय मे भाषण पूर्ण हुआ। सबके चेहरे स्तब्ध थे , मैं आश्चर्यचकित था कि ये क्या मैं ही था। परिणाम आया और प्रथम स्थान मिला, तब मैंने देखा कि मुन्ना मास्टर साहब का सीना छप्पन इंच का हो चुका है, भौहे तनी हुई है, चेहरे पर आत्मसंतोष और गर्व का मिश्रित भाव है। मैंने उनके चरण छुए, आमतौर पर वो भोजपुरी में आशीर्वाद देते थे " जियत रह  बच्चा" परन्तु उस दिन उनके मुख से अंग्रजी की धारा निकल पड़ी, बोले गॉड  ब्लेस यु । 
आज लगभग 20 वर्ष बाद जब किसी बात से निराश हताश बैठा था, तभी मुझे मुन्ना मास्टर साहब की वो बात याद आयी, वर्तमान में रहो, भूतकाल में रहोगे तो टेन्स नही सीख पाओगे, सही तो है ये जीवन भी तो हमारे कर्मो का और विचारों का अनुवाद है। ऐसा लिखते समय मुन्ना सर की दिव्य मूर्ति का ध्यान हो आया, सर आप को कोटि कोटि नमन है, आप स्वस्थ रहे और काश की मैं आपका एक प्रतिशत भी शिक्षक बन सकू।

No comments:

Post a Comment

एक संस्मरण ।।

एक संस्मरण  बात पांचवी दर्जे की है, अंग्रेजी के अनुवाद बनाने के नियम पढ़ाते हुए मुन्ना मास्टर साहब ने कहा कि , वाक्य के अंत मे ता है , ती है ...